लेखनी प्रतियोगिता -31-May-2022 संयुक्त परिवार प्रथा
आरुषी की शादी को एक महीना ही हुआ था। अब तक घर के सभी सदस्य उसको नयी बहू कहकर उसे कोई काम नहीं करने देते थे। आरुषी इतना प्यार पाकर बहुत खुश थी।
परन्तु एक माह के बाद आरुषी के कन्धौ पर घर के काम का सारा बोझ डाल दिया गया। अब आरुषी नयी बहू स्वयं को एक नौकरानी समझने लगी।
वह सुबह उठकर ही काम पर लग जाती और उसे यह ही नही पता लगता कि कब रात होगयी । कभी कभी तो उसे खाना भी नसीब नहीं होता था।
वह सुबह उठकर सास ससुर कं चाय बनाकर देती थी। इसके बाद जिठानी के बच्चौ को स्कूल के लिए तैयार करती।थी। क्यौकि उसकी जिठानी अधिकतर अपने मायके में ही रहती थी।
फिर ननद की सेवा मे लग जाती इसके बाद पति को जगाकर चाय देती फिर उनके नहाने के लिए पानी गर्म करना उनको कपडे देना। इसके बाद उनका खाना बनाकर आफिस का टिफिन देना। तब तक सास ससुर मार्निंग बाक से आजाते फिर उनके नहाने का इन्तजाम करना फिर उनके लिए नाश्ता तैयार करना।
कुछ समय बाद ही स्कूल से बच्चे आजाते फिर उनके लिए खाना देना। सास ससुर को खाना देना। इसतरह कुछ समय बाद चाय का समय और सास की आवाज आजाती कि आरुषी कहाँ है क्याबात आज चाय नहीं मिलेगी क्या ? फिर रात के खाने की तैयारी।
रात को पति के नखरे सहन करना । आरुषी कोई य। भी नही पूछता कि तुमने कुछ खाया या नहीं। केवल उसके जेठजी एक ऐसे थे जो अपना काम स्वयं करते थे। उनके पास चाय व खाना जब भी पहुँच जाता वह खालेते उन्हौने कभी भी नमक भी नहीं माँगा था
एक दिन आरुषी सोचने लगी जब तक मै यहाँ नहीं थी यह काम कौन करता था। जिठानीजी अपने मायके ही क्यौ रहती है। अब वह यह पूछे किससे?
आरुषी रक्षाबन्धन पर मायके गयी और जब उसकी माँने उसका हाल पूछा तब अपनी माँ से शिकायत करती हुई बोली ," आप लोगौ ने मेरी शादी कहाँ करदी। उनको बहू नही नौकरानी चाहिए थी।
"क्यौ क्या हुआ जो तू उस तरह बोल रही है? " उसकी माँ ने पूछा।
"आपतो ऐसे पूछ रही है कि कोई फिल्मी स्टोरी पूछ रहा हो" आरुषी ने अपनी माँ से पूछा।
उसकीमाँ ने फिर से वही पूछा।
आरुषी बोली," मम्मी सुबह पाँच बजे चारपाई से खडी़ होती हूँ इसकज बाद कोई यह भी नही पूछता कि बहू तूनै भी कुछ खाया है।। बस सबको हर बस्तु अपने ठिकाने पर चाहिए। और मेरी जिठानी तो मायके ही रहती है। वह काम के डर से ही वहाँ रहती होगी। केवल एक जेठ जी है जो हमेशा अपना काम स्वयं करते है।
आरुषी की माँ समझाते हुए बोली," देख बेटा मै पीयूष से कह दूगी तेरे लिए अलग रहने का इन्तजाम कर देगा फिर तेरे पास बहुत कम काम रह जायेगा किसीकी सेवा नही करनी होगी लेकिन सोच लेना जब तुझे जरूरत होगी कोई नहीं आयेगा।"
" मम्मी मुझे नहीं चाहिए। मुझसे इतना सब मैनेज नही होता आप पीयूष को कहदो कि वह अपना ट्रान्सफर कहीं और करवालै। मै कहूँगी तो उनको बुरा लगेगा।" आरुषी ने जबाब दिया।
आरुषी की मम्मी ने पीयूष को समझाया कि आरुषी को अलग रहने का भूत सवार है तुम कुछ दि के लिए उसे शहर लेजाओ। कुछ दिन बाद ही उसका यह भूत अपने आप ही उतर जायेगा।
पीयूष ने अपनी मम्मी से बात की और शहर में एक छोटा सा मकान किराये पर ले लिया। आरुषी कुछ दिन तो ठीक रही परन्तु अब उसे अकेला पन काटने लगा। पूरे दिन कोई काम तो था ही नही।
अब आरुषी को अकेलापन काटने लगा ़ह बात किससे करे सारा दिन सोना भी तं नही हो सकता था।
छःमहीने होगये गाँव से भी कोई मिलने नही आया। उसकी मम्मी भी बहाने बनाकर एक बार भी नही आई। किसी से पहचान भी नही थी
एक दिन आरुषी बोली," पीयूष चलो गाँव चलतते है। परन्तु पीयूष आफिस का बहाना बनादेता और उसे लेकर नहीं गया।
जब वह अधिकतर अकेली रहकर परेशान रहने लगी ।उसने अपनी मम्मी को ही बताया कि वह गाँव जाना चाहती है मेरी बात पीयूष नही सुन रहा।
उसकी मम्मी सब समझ गयी और उसने पीयूष को समझाकर उसे गाँव लेजाने के लिए कह दिया।
कुछ दिन बाद पीयूष उसे गाँव लेगया वहाँ वह सबसे मिलकर खुश होगयी।अब उसकी सास ने सबको अपना काम आप करने को कह दिया क्यौकि वह माँ बनने वाली थी।
इस तरह संयुक्त परिवार से हमे बहुत फायदे थे परन्तु आज यह समाप्त होरहे है इसीलिए बृद्धाश्रम भी बढ़ रहे है पहले बृद्धाश्रम कहाँ होते थे।
दैनिक प्रतियोगिता के लिए रचना
नरेश शर्मा " पचौरी"
,
Manisha Das
01-Jun-2022 10:11 PM
Nice
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Shrishti pandey
01-Jun-2022 08:59 PM
Very nice
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Seema Priyadarshini sahay
01-Jun-2022 11:23 AM
बेहतरीन👌👌
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